Showing posts with label Intellectual Terrorism. Show all posts
Showing posts with label Intellectual Terrorism. Show all posts

Saturday, 9 September 2017

#अप्राइम_टाइम #भाग1 #गौरी_लंकेश (Gauri Lankesh)

नमस्कार,
     अप्राइम टाइम में आपका स्वागत है | अप्राइम टाइम इसीलिए क्युकि अभी दोपहर के 2 बज के तीस मिनट हो रहे हैं | लिखने के लिए इसे प्राइम टाइम में भी लिख सकते थे | पर उस समय आपको समय नहीं होता | उस समय टीवी पर तरह तरह के एंकर आते हैं | आप उन्हें देखने में व्यस्त रहते हैं जो सब्जबाग दिखाते हैं | अपनी अपनी विचारधाराओं का प्रचार प्रसार करते हैं | वो एंकर सब कुछ करते हैं पर नहीं करते तो सिर्फ पत्रकारिता जिसके नाम पर वो रोटियां कमाते हैं | माफ़ करना गलत बोल दिया .. सही शब्द हैं बोटियाँ कमाते हैं .. दलाली करते हैं .. 'पत्रकारिता की'

     हाल ही में गौरी लंकेश (Gauri Lankesh) की हत्या की गयी | उस बैंगलोर सिटी में जिसे कर्णाटक की राजधानी होने के साथ साथ देश की आईटी राजधानी होने का भी गौरव प्राप्त है | ये वही सिटी है जिसके वीडियोस आप सभी ने १ जनवरी की सुबह भी देखे थे | कानून व्यवस्था को तार तार करते शोहदों के हाथ वहां जश्न मना रही लड़कियों के जिस्म को आतंकित कर रहे थे | कमाल की बात है कि प्राइम टाइम में मुद्दा देश की आईटी राजधानी में बढ़ते अपराध नहीं हैं | बल्कि मुद्दा राईट वर्सेस लेफ्ट है | एंड ऑफ़कोर्स क्रेडिट गोज टू आर प्राइम टाइम 'एंकर्स' |
     खैर इस अप्राइम टाइम में हम इन्हीं एंकर्स को बेनकाब करेंगे और साथ में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता वाले उस दोगले प्राणियों पर भी चर्चा करेंगे जो इस समय उफान पर हैं |
     सर्वप्रथम शुरुवात सुश्री गौरी लंकेश से करते हैं | हालाँकि ये इतने सम्मान की हक़दार नहीं है पर फिर भी संघी होने के नाते एक स्त्री का सम्मान करना फर्ज है | मैडम अपने को नास्तिक और सेक्युलर कहती थीं | और हिन्दू धर्म को मिथ कहती थी | एक नंबर की बदतमीज और ट्रोल करने वाली औरत थी और साथ में बददिमाग भी | माफ़ कीजियेगा किसी मरे हुए के लिए ऐसे शब्द निकालना उचित नहीं है किन्तु मैं स्पष्टवादी हूँ | मैं वही कह रहा हूँ जो इन महोदया की वाल कह रही है |
 

     मैंने गौरी लंकेश की वाल पर चक्कर लगाया और पाया कि सिवाय विषवमन और गलतबयानी के इन्होने पत्रकारिता के नाम पर कुछ नहीं किया है | केरल में मरने वाले स्वयंसेवकों के लिए इन्होने स्वच्छ केरलं शब्द का प्रयोग किया है | फेक पोस्ट का इन्होने समर्थन किया | ऊपर से अपने वामपंथी साथियों को एक दुसरे को एक्सपोज न करने की हिदायत तक दे डाली | अपनी एक अन्य पोस्ट में इन्होने एक गधे पर मोदी लिखा है | अपनी इन्हीं फेक पोस्ट्स और जहर उगलने वाली भाषा की वजह से ये जेल भी जा चुकी है | एक पोस्ट पर तो जाहिली की सातवी सरहद इन्होने पार कर दी |
     उसमे मोहतरमा लिखती हैं कि संघी या तो रेप प्रोडक्ट होते हैं या फिर सेक्स वर्कर के प्रोडक्ट | सेक्स वर्कर को हिंदी में वैश्या और शुद्ध हिंदी में रंडी कहा जाता है | एक संघी भी किसी न किसी महिला की ही संतान होती है | एक महिला होकर(?) किसी महिला के बारे में ऐसा भद्दा लिखना एक वामपंथी को ही सुशिभित कर सकता है | गिरने की भी एक हद होती है | महोदया ने वो सारी हदें पार कर दी थी | जाहिर है ऐसा लिखने वाली महिला मानसिक रूप से स्वस्थ तो हो नहीं सकती | फिर भी हम इनका सम्मान करते हैं | क्युकि हम इनके लेवल पर नहीं गिर सकते |

                                                   
     मैंने गौतम बुद्ध की एक कहानी पढ़ी थी | जिसमे एक व्यक्ति गौतम बुद्ध को गालियां देता है और तथागत निर्विकार रूप से उसे सुनते रहते हैं | अंत में पूछने पर बुद्ध ने कहा कि जिस प्रकार तुम मुझे खाना परोसो और मैं उस खाने को ग्रहण न करूँ तो वो खाना तुम्हारे पास ही रह जाता है | ठीक उसी प्रकार मैं तुम्हारी गालियाँ भी ग्रहण करने से इंकार करता हूँ | ये तुम्हारे अपशब्द तुम्हारी थाती हैं इन्हें सहेज के रखिये | मैं तथागत इन्हें अस्वीकार करता हूँ |
     ठीक उसी तरह गौरी लंकेश मैं अनुज अग्रवाल अपनी और अपने संघी भाई बहनों की तरफ से तुम्हारी उन सारी गालीयों को ग्रहण करने से इंकार करता हूँ | तुम्हारे सारे अपशब्द तुम्हारी थाती हैं | इन्हें सहेज के रखिये और अपने परिजनों को सादर गिफ्ट कीजिये | हालाँकि मुझे इसका भी दुःख हुआ | अपनी माँ के लिए इस तरह के शब्द आपको नहीं निकालने चाहिए थे |
     अब आप मृत हैं तो इन सब बातों का क्या फायदा | पर सच तो सामने आना ही चाहिए न | खैर भरे मन से आपको श्रद्धांजलि .. ईश्वर आपको अपनी शरण में लें और थोड़ी सी तमीज़ भी सिखाएं | ताकि अगले जन्म में आप इन्सान बन सकें |
-अनुज अग्रवाल

Thursday, 23 February 2017

एक जंग बौद्धिक आतंकियों के खिलाफ

     अभी हाल ही में रामजस कॉलेज में AISA के बौद्धिक आतंकवादियों द्वारा देश में फिर से अराजकता उत्पन्न करने का कुत्सित प्रयास किया गया | एक सेमिनार थी जिसमे देश द्रोह के आरोपियों को बोलना था | विषय था "कल्चर ऑफ़ प्रोटेस्ट - अ सेमिनार एक्सप्लोरिंग रेप्रजेंटेशन ऑफ़ डिसेंट" |
                               
     विरोध की संस्कृति कैसी होनी चाहिए इस पर वो लोग बोलना चाहते थे जिन्होंने मेरे भारतवर्ष के विरोध में इसके टुकड़े-टुकड़े करने की कसमे खायीं | भारत के अभिन्न अंग कश्मीर को भारत से आज़ाद करने के हिंसक आन्दोलन के समर्थक स्टेज पर बोलेंगे कि हमें विरोध कैसे करना चाहिए ? आयरनी ये है कि जो लोग खूनी माओवाद के धुर समर्थक हैं, जिनका संगठन JNU तक में बैन है, जिनके आकाओं के कहा कि "सत्ता बन्दूक की नालियों से गुजरती है " "वो कामरेड हो ही नहीं सकता जिसके हाथ खून से न रंगे हों |" ऐसे नरपिशाच लोग DU के छात्रो को सिखायेंगे कि विरोध कैसे करना चाहिए ?
     कहते हैं बच्चे अनगढ़ मिट्टी और शिक्षक कुम्हार होता है | कुम्हार अपनी चाक पर मिट्टी को घुमा घुमा कर घड़ा बना सकता है | पर वही मिट्टी जो एक सुन्दर सुराही बन सकती थी जरा सी असावधानी होने कूड़े के ढेर का हिस्सा हो जाती है | यहाँ इस संस्थानों में ऐसे प्रोफेसर्स बहुतायत में हैं जो deliberately स्टूडेंट्स का ब्रेन वाश कर उन्हें कूड़े के ढेर का हिस्सा बना रहे हैं | JNU में किस तरह आतंकवादियों से सॉफ्ट कॉर्नर रखने वाले स्टूडेंट्स और प्रोफेसर्स हैं ये हम सभी जानते हैं | भारत की श्रमजीवी जनता के मेहनत के पैसे पर पलने वाले ये पैरासाइट्स भारत के खिलाफ, भारत के बेटों में ही जहर भरते हैं |
         
     अब तक इनका दायरा सीमित था | ये सब देश की चुनिन्दा यूनिवर्सिटीज में होता था | जैसे JNU AMU आदि आदि | वहां से जम्मू और जाधवपुर यूनिवर्सिटी पहुंचे | अब इनका निशाना राष्ट्रवादियों का गढ़ दिल्ली यूनिवर्सिटी है | अब ये विषाणु हर जगह पांव पसारने की कोशिश कर रहे हैं | फिर इनके समर्थन में इनका नेक्सस आ जाता है | हाँ वही दलाल पत्रकार और वोट्स के भूखे नेता | ये वो वर्ग है जिसे इस देश के प्रति कभी श्रद्धा नहीं रही है | आप गौर से देख लीजिये | इनके समर्थन में वो सब लोग होंगे जो कश्मीर में आतंकवादियो के समर्थक हैं | जिनकी नजर में सेना बलात्कारी है | जिनकी नजर में नक्सल आतंकी मासूम हैं | जो NGO के खेल में सक्रिय हैं | जिनके लिए हिन्दुस्थान अब रहने लायक नहीं बचा है | और सबसे महत्वपूर्ण जिनकी नजर में औरंगजेब मसीहा है |
     जब ऐसे लोगों का विरोध होता है | तब यही लोग पहले उकसाने वाले नारे लगाते हैं | थूकते हैं गालियाँ देते हैं | ढोल की थाप पर कोरस गातें हैं नीम का पत्ता कडवा है और फलां आदमी @#वा है | पलट के कोई बोल दें अबे तुम साले अपने देश को गरियाते हो | तुम तो सोनागाछी के कोठों की पैदाइश हो | फिर ये लोग हमला बोल देते हैं | मारपीट करते हैं | पलट के कोई इनके गाल गरम कर दे तो ये लोग विक्टिम कार्ड खेलना शुरू कर देते हैं | ये ऐसे दर्शातें हैं जैसे इस देश में ये अति शोषित लोग हैं | इनका काम सरल करते हैं मीडिया में बैठे इनके दलाल | जिनकी रिपोर्टिंग और शब्द ऐसे होते हैं जो देश की जनता में इनके लिए सहानुभूति उत्पन्न करते हैं |
     मैं हमेशा से कहता हूँ | वैचारिक लड़ाई में आपका पक्ष आपके शब्द रखते हैं | आप तटस्थ होकर भी तटस्थ नहीं होते | वो आपके शब्द होते हैं जो आपको तटस्थ रखते हुए आपके अन्दर के पक्ष को उजागर करते हैं | इसे समझने के लिए एक उदाहरण लेते हैं :- आप कभी भी देख लीजिये | पत्रकार विशेष हमेशा किसी भी विवाद की स्तिथि में रिपोर्टिंग करते समय AISA के स्टूडेंट्स और ABVP के कार्यकर्त्ता या सदस्य बोलेंगे | वो कभी ABVP के छात्र शब्द का प्रयोग नहीं करेंगे | जैसे कि AISA जैसे संगठनो के लिए ये करते हैं | कुछ पत्रकार जिनके घरवाले ‘लड़कियों की दलाली’ में संलग्न हैं और जो ‘क्रन्तिकारी चैनल’ से हैं वो तो ABVP के गुंडे शब्द का प्रयोग तक कर देते हैं |
                                      
     ऐसे लोग हमेशा वामपंथी संगठनों की मारपीट या देशद्रोह को बढ़ी चालाकी से छिपाते हैं | उदाहरण के लिए आपमें से कितने लोग जानते हैं कि दंतेवाडा में 76 जवानो की नृशंस हत्या पर JNU के आतंकियों ने जश्न मनाया था ? कितने लोग जानते हैं कि JNU में महिषासुर के नाम पर माँ दुर्गा का अपमान किया गया था ? आपमें से कितने लोग जानते हैं कि 29 अप्रैल 2000 को JNU में 2 आर्मी ऑफिसर्स को मर्सीलेस्ली पीटा गया था क्युकि उन्होंने वहां मुशायरे में एंटी इंडिया स्लोगन्स का विरोध किया | अब आप खुद से पूछिए कि क्या ये न्यूज़ आपको टीवी काली करने वालों ने या देश को इंटोलरेंट बताने वालों ने प्राइम टाइम पर दिखाई थी क्या ? पूछिये इनसे कि तब इनके कैमरे कहाँ थे ? यही लोग हैं जो एक पक्ष के प्रोपेगेंडा को प्रमोट करते हैं | बिना पक्ष लिए अपना पक्ष रखना इसी को कहते हैं | और इस नेक्सस का सच सामने लाना बहुत जरूरी है |
     आइये उन सभी को जबाब दें जो भरपूर दें जो हमारे देश के खिलाफ हैं | जिनका सपना भारत की बर्बादी है | आइये जंग छेड़े उन बौद्धिक आतंकवादियों के खिलाफ जो हमारे देश के टुकड़े टुकड़े करना चाहते हैं | अब समय है हम पलट कर जबाब दें | कोई आपको ABVP का गुंडा कहे आप जबाब में AISA का आतंकवादी कहें | वो दिन गए जब आप लोगों की प्रोपेगेंडा पॉलिटिक्स हम चुपचाप सह लेते थे | अब भारत की तरुणाई जाग चुकी है | ये अब तक सहा है अब नहीं सहेंगे | इस गुंडागर्दी का हम हर संभव विरोध करेंगे | आज भगवान आशुतोष का दिन है | आइये इस महाशिवरात्रि पर इस विषवेल के समूल विनाश की शपथ लें | लगायें हर हर महादेव का नारा और संहार कर दें भारत माँ आंचल को तार – तार करने का सपना देखने वालों का |
जय हिन्द जय भारत
हर हर महादेव